तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति भारत, श्री ज्ञानी जैल सिंह दिनांक २० अप्रेल, १९८६ को संस्थान में पधारे थे । आपने जो विचार एंव सुझाव दिये वे इस प्रकार हैं :- ''मौलाना अबुल कलाम आज़ाद अरबी फारसी शोध संस्थान, राजस्थान, टोंक को देखकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई । यह राष्ट्रीय एकता एंव मिश्रित सभ्यता का स्थल है । राजस्थान सरकार को इस पर गर्व होना चाहिए । दो वर्ष पूर्व मैने खुदा बख्६ा ओरियण्टल पब्लिक लाईब्रेरी, पटना को देखा था तत्समय मेरा विचार था कि उसके समान कोई दूसरा संस्थान नहीं है परन्तु इस संस्थान को देखने के पश्चात मै इस निष्कर्ष पर पहुंॅंचा हूॅं कि यदि इसे मैं नहीं देखता तो यह मेरी भूल होती क्योंकि यह संस्थान म६ारिक़ी उलूम का एक महत्वपूर्ण संग्रह है। इस अवसर पर मेरा सुझाव है कि दुर्लभ हस्तलिखित ग्रन्थों का उर्दू एवं हिन्दी में अनुवाद करवाया जाना चाहिए ताकि व्यक्ति लाभान्वित हो सकें।''