विभिन्न  गतिविधियां 

 

         संस्थान ने सृजन से अब तक निरन्तर सेमिनार आयोजित किये हैं। इन सेमिनारों में  विभिन्न विषयों पर मक़ाले पढे गए जिनमें राष्ट्रीय महत्व के शीर्षक तथा क़ौमी एकता व साम्प्रदायिक सदभाव जैसे विषय भी सम्मिलित रहे हैं। इन सेमिनारों में पढ़े गये मक़ालात,   मजामीन संस्थान के वार्षिक रिसर्च जर्नल में प्रकाशित किये जाते रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अन्तर्गत संस्थान मुशायरा, चारबैत एंव क़व्वाली भी आयोजित करता रहा है ।

 

       संस्थान नवाब मोहम्मद अली खां फैलोशिप एंव नवाब अमीरूददौला स्कालरशिप स्कीम के अन्तर्गत फैलोशिप,स्कालरशिप आवंटित करता है। दो फैलोशिप्स एंव चार स्कालरशिप्स क्रमश: १८००/-रू० एंव ४००/-रू० प्रति माह ऐसे शोधार्थियों को दी जाती हैं जो भारत में विधि द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय में रजिस्टर्ड स्कालर हों अथवा प्रतिष्ठित विद्वान हो जिनका शोध विषय संस्थान के मूल स्त्रोतों पर आधारित हो ।                 

 

     क़ौमी कोन्सिल बराए फ़रोग़ ए उर्दू जबान,  मानव संसाधन विकास मन्त्रालय (शिक्षा विभाग)  नईदिल्ली,भारत सरकार के सोजन्य से एक वर्षीय कम्प्यूटर डिप्लोमा कोर्स सत्र १९९९-२००० से संचालित किया जा रहा है,  इसमें प्रति वर्ष साठ विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है । इस कोर्स के द्वारा विद्यार्थियों को कम्प्यूट्रीकृत कैलिग्राफी के साथ कम्प्यूटर की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराई जाती है ।

 

      राज्य सरकार द्वारा एक वर्षीय मेन्युस्क्रिप्टॉलाज की कक्षाओं का संचालन सत्र १९९८-९९ से किया जा रहा है । इसमें दस छात्र/छात्राओं को प्रति वर्ष प्रवेश दिया जाता है । इसमें ५००/-रू० प्रति माह प्रत्येक छात्र को स्कालरशिप भी दी जाती है । इस कोर्स के माध्यम से विद्यार्थी पुराने हस्तालिखित ग्रन्थों, सिक्कों एंव मोहरों को पढ़ने की कला एंव ज्ञान काग़ज, रोशनाई की पहचान आदि कार्यों की जानकारी प्राप्त करते हैं । इस कोर्स के माध्यम से पुराने सरकारी रिकार्ड विशेष तोर से अदालतों के पुराने काग़जात को समझने की समस्या का भी समाधान हो सकेगा तथा आने वाले समय में सिस्टर विभागों को उपलब्ध ग्रन्थों,  अभिलेखों को पढ़ने एंव समझने के लिएं लोग उपलब्ध हो सकेंगे।               

 

    कौमी काउन्सिल बराए फरौग़ ए उर्दू जबान, मानव संसाधन विकास मन्त्रालय, शिक्षा विभाग,  नईदिल्ली, भारत सरकार द्वारा उर्दू में ख़त्ताती एवं ग्राफ़िक ड़िजाइन का कोर्स भी दिनांक 1 अप्रेल, २००१ से प्रारम्भ हो चुका है जिसमें २५ प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

 

       शोध कर्ताओं को रियायती दरों पर आवास सुविध उपलब्ध कराई जाती है।संस्थान शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करता है एवं सभी शोध संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। विभिन्न कार्यक्रमो जैसे हस्तलिखित ग्रन्थों का सम्पादन, केटेलाग का निर्माण, मुद्रित पुस्तकों का वर्गीकरण एवं अरबी फारसी एवं उर्दू के हस्तलिखित ग्रन्थों की हिन्दी, उर्दू एवं अंग्रेजी में हेण्ड लिस्ट तैयार करवाने का कार्य प्रगति पर है। 

 

 

                 

 

संस्थान अपनी दुर्लभ कैलीग्राफी कला द्वारा आगुन्तकों को आकर्षित करता है एवं इसका प्रदर्शन करता है। आर्ट गैलेर की स्थापना कर विभिन्न कलात्मक कार्यो का प्रदर्श किया गया है।संस्थान द्वारा अनुवाद, नकल नवीसी एवं प्रकाशन आदि मुख्य कार्य भी किये जा रहे हैं।

 

 

 

सर्वे के पश्चात  प्राप्त हस्तलिखित ग्रन्थों की सुरक्षा की दृष्टि से ग्रन्थों का लेमिनेशन, बाइण्डिंग, फयूमीगेशन, फोटो कापी एवं माईक्रो फिल्मिंग की जाती है, जिससे इन ग्रन्थों का परिरक्षण एवं संरक्षण सम्भव हो सके एवं शोधार्थियों द्वारा इनका बेहतर उपयोग किया जा सके ।

 

 

 

संस्थान विभिन्न राज्यों में आयोजित राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पुस्तक मेलों में भी भाग लेता है एवं अपने प्रकाशनों का प्रदर्श एंव विक्रय करता है।