संस्थान की धरोहर
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यह संस्थान अपने दुर्लभ एवं अद्भुत साहित्य के लिए विश्व प्रसिद्ध है। यहां हिस्टोरियोग्राफी, ओरियन्टोलोजी एवं इस्लामिक स्टडीज पर अमूल्य एवं दुर्लभ सामग्री संग्रहित है। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषयों जैसे सूफिज्म, उर्दू, अरबी एवं फारसी साहित्य, केटेलाग्स, यूनानी चिकित्सा, स्वानेह हयात (आत्म कथा), मध्य कालीन इतिहास, स्वतन्त्रता अभियान पर साहित्य, ख़त्ताती, रीमिया, कीमिया, सीमिया, दर्शन, तर्कशास्त्र, विधि शास्त्र, मन्तिक़, विज्ञान एवं शिकार आदि विषयों पर असीम साहित्य उपलब्ध है। |
उपरोक्त साहित्य पर संस्थान में 8351 हस्तलिखित ग्रन्थ, 30528 मुद्रित पुस्तकें एवं 16345 पत्रिकाएं विद्यमान हैं जो विभिन्न भाषाओं जैसे अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी एवं हिन्दी पर आधारित हैं। हस्तलिखित ग्रन्थों की यह विशेषता है कि इनमें से कई ग्रन्थों पर सोने की लिखाई मौजूद है एवं कई ग्रन्थ सुन्दर कैलीग्राफी की सर्वोत्कृष्ठ कृतियां हैं । संस्थान में कैलीग्राफी के सुन्दर नमूने एवं तुग़रे भी महत्वपूर्ण हैं।
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अरबी एंव फारसी के हस्तलिखित ग्रंथों के अतिरिक्त यहां विभिन्न विषयों पर आधारित उर्दू के हस्तलिखित ग्रंथ भी पर्याप्त संख्या में सुरक्षित हैं जो १९वीं शताब्दी से संबन्धित हैं । इनमें से अधिकांश ग्रंथ राजस्थान के संदर्भ में लिखे गए हैं और जो भारत के अन्य पुस्तकालयों में प्रायः उपलब्ध नहीं हैं ।
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कुछ दुर्लभ ग्रंथों के नाम निम्न प्रकार हैं:- (१) तारीखे ग़रीबी (पद्य) (२) दीवाने मिजर अकबर अली बैग गुल (पद्य)(मीर तक़ी मीर के एक शिष्य) (३) क़िस्सह-ए-रंगीं गुफ़तार (लेखक-अजमतुल्लाह नियाज) (गद्य) (४) बैरम नामा (लेखक- एम० उमर फ़सीह) (गद्य) (५) कुर्रत-उल-उयून (लेखक-नवाब मोहम्मद अली खां) (गद्य) (६) दीवाने एश (शेख़ निजामुद्दीन) (पद्य) (७) तारीख़े मुलहिम (लेखक- मौलाना एहतिशाम-उद-दीन-शौकत)(पद्य)
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